HINDI LOVE STORY

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A sad Hindi Love Story – Why it happened with me? Final part in hindi


अगले दिन सुबह उठते ही मैने सीमा को कहा की चल तैयार हो जा. हॉस्पिटल जाना है. सीमा की आँखों में नींद भरी हुई थी. वो बहुत देर तक मेरी और देखती रही और बोली – मैं दाल भात में मूसल चन्द बन के क्या करूँगी? तू जा और अपने प्यारे राजेश के पास बैठ, उससे बात कर. मैं कबाब में हड्डी बन के क्या करूँगी.

मैने कहा – मेरी बहन सीमा, मेरी अच्छी बहन सीमा, चल ना. देख अकेले मुझे मौसी जी जाने नहीं देंगी. बात समझ.

सीमा बोली, ठीक है, चलती हूँ, तैयार तो होने दे. तू भी क्या याद रखेगी.

फिर हम दोनों तैयार हो कर ऑटो ले कर हॉस्पिटल चले गये. वहाँ जा कर पता चला की राजेश के पापा आज घर चले गये थे. शाम को आएँगे उसकी मम्मी के साथ.

हम अंदर कमरे में गये तो देखा राजेश सोया हुआ था. सीमा ने कहा तू अपने राजेश के जागने का इंतज़ार कर. मेरी एक सहेली यहीं पास में रहती है मैं उससे मिल कर आती हूँ. यह कह कर वो चली गयी.

मैं बहुत देर तक उसके पास बैठी रही. करीब एक घंटे बाद राजेश की नींद खुली. नींद खुलते ही उसकी नज़र मुझ पर पड़ी. उसके मुँह से निकला – अनिता, तुम यहाँ?

मैने कहा, हाँ , मैं यहाँ! और मुस्कुरा पड़ी. वो भी मुझे देख कर मुस्कुरा दिया.
फिर मैंने पूछा की तुम्हें मेरा नाम कैसे पता चला? उसने बोला – पापा ने बताया था.

फिर अचानक उसने मेरा हाथ अपने हाथों में थाम लिया. मेरे सारे शरीर में कंपकपि दौड़ गयी. बहुत देर तक हम ऐसे ही बैठे रहे. फिर हम दोनों ने कुछ ऐसे ही बातें शुरू की. बातें शुरू हुई तो बंद होने का नाम ही नहीं ले रही थी. हमने अपने बचपन की, स्कूल की, दोस्तों की, घरवालों के बारे में, जाने कितनी बातें की. ऐसा लग ही नहीं रहा था की हम एक दूसरे को पहले से नहीं जानते थे.

तभी नर्स आई और बोली – इतनी बातें ठीक नहीं है. अब पेशेंट को सोने दो. राजेश ने दवाई खाई और कहा, ठीक है सिस्टर. और आँखे बंद कर ली.

जैसे ही नर्स गयी, राजेश ने आँखे खोली और हंस पड़ा. हमारी बातें फिर शुरू हो गयी. हम फिर से बहुत देर तक बातें करते रहे.

बारह बजे सीमा आ गयी. आते ही मसखरे अंदाज में बोली – तो स्टोरी कहाँ तक आगे बढ़ी? मैं बोली, चुप बदमाश! और फिर मेरी हँसी निकल पड़ी. राजेश भी हँसने लगा. मैने उसकी तरफ देखा तो उसकी आँखों में एक अलग ही फीलिंग नज़र आई. मैं कुछ समझ नही पाई की उसका मतलब क्या था.

सीमा लेकिन मस्ती के मूड में थी – बोली, बताओ बताओ जी –क्या बातें हो रही थी. हमने कहा कुछ नहीं ऐसे ही.
फिर हम दोनों ने राजेश को बाइ कहा और वापस चल दिए.

बस फिर ये सिलसिला चल निकला. मैं रोज सीमा को लेकर हॉस्पिटल जाती. कभी राजेश की मम्मी मिलती, कभी उसके पापा. थोड़ी बातें करने के बाद उसके मम्मी-पापा ये कह के बाहर चले जाते की बच्चों, तुम लोग बातें करो. सीमा भी अक्सर अपने दोस्तों के यहाँ चली जाती. फिर हम दोनों रह जाते और बहुत सारी बातें करते.

राजेश धीरे धीरे उठने बैठने लगा था. 8-10 दिन बाद तो वो चलने भी लगा था. हम हॉस्पिटल के लॉन में भी चले जाते थे. डॉक्टर ने कहा की सर की चोट काफ़ी ठीक हो गयी है. 2-4 दिन में छुट्टी मिल जाएगी.


हम रोज घंटों बातें करते. धीरे धीरे हम करीब आते गये. करीब दसवें दिन की बात है की अचानक राजेश ने कहा – अनिता मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ. मैने कहा –बताओ, क्या है? लेकिन मेरे दिल में एक अजीब सी फीलिंग हो रही थी की वो क्या कहेगा. क्यूंकी मैं भी उसके लिए अब मन में आकर्षण फील करने लगी थी लेकिन इतनी हिम्मत नहीं थी की कुछ कह पाती। .

राजेश ने कहा – अनिता, मैं, मैं..
मैने कहा, क्या मैं मैं, कहो ना, क्या कहना चाहते हो?
उसने कहा – अनिता, मैं…
तभी सीमा आ गयी और बात यहीं ख़त्म हो गयी.

अगले दिन मैं उठी तो मुझे तेज बुखार था. कई दिन तक मैं बुखार में लेटी रही. जब ठीक हुई तो मैं सीमा को लेकर हॉस्पिटल गयी. पता चला की राजेश तो एक दिन पहले ही हॉस्पिटल से डिसचार्ज हो गया था और उसके पेरेंट्स उसे ले कर मुरादाबाद चले गये थे.

मुझे बहुत बुरा लगा. तभी ख़याल आया की मैने तो उसका नंबर भी नहीं लिया था. हाँ, बैटन में इतना ज़रूर पता चला था की वो मुरादाबाद में सिविल लाइन्स में रहता था. मेरा घर शाश्त्रीनगर में था जो उसके घर से करीब 5 किलोमीटर दूर था.

मैं मन मसोस कर वापस आने लगी तो रिसेप्षन से आवाज़ आई -आप अनिता हैं? मैने कहा जी हन. तो रिसेप्षनिस्ट ने कहा की राजेश ने एक मेसेज छोड़ा है तुम्हारे लिए. मैं देखा तो एक दवाई के पर्ची थी. उसके अंदर एक और पर्ची फोल्ड कर के रखी थी. उसे खोला तो उस पे लिखा था – आई लव यु . मैने तुम्हारा बहुत इंतजार किया, लेकिन तुम नहीं आई.

मैं तो खुशी के मारे आसमान पर पहुँच गयी. साथ ही शर्म के मारे चेहरा लाल हो गया. सीमा बोली – अनिता रानी, क्या बात है, बड़ी चहक रही हो ? फिर उसने मेरे हाथ से पर्ची ली और उसे पढ़ा. पढ़ते ही उसने मुझे बाहों में ले लिया और धीरे से बोली – अनिता, आई एम् सो हैप्पी फॉर यु . वो बहुत अच्च्छा लड़का है.
फिर बचे हुए छुट्टी के दिन ऐसे ही बीत गये इधर उधर घूमने में.

जैसे ही छुट्टियाँ ख़तम हुई, पापा मुझे ले कर मुरादाबाद आ गये. अगले ही दिन मैने अपनी स्कूटी उठाई और सिविल लाइन्स चल पड़ी. मुझे कुछ कुछ अंदाज़ा था की वो कहाँ रहता है. मैं सिविल लाइन्स पहुँची और कुछ लोगों से पूछा तो उसके पापा का नाम सुनकर मुझे एक लड़के ने उसका घर बता दिया. मैं जब उस गली पहुँची तो मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था.

इससे आगे की स्टोरी राजेश के शब्दों में –

राजेश – मैं अपने घर से जैसे ही बाइक पे निकला तो मैने देखा की घर के सामने से एक कार बड़ी तेज़ी से गयी और सीधा जाके एक स्कूटी से टकराई. स्कूटी एक लड़की चला रही थी जिसने लाल स्कर्ट और सफेद शर्ट पहनी हुई थी. मुझे वो ड्रेस कुछ पहचानी हुई लगी लेकिन सोचने का वक़्त नहीं था. जैसे ही मैं भाग के वहाँ पहुँचा तो देखा की वो लड़की स्कूटी से गिर कर सड़क पर पड़ी हुई थी. उसका मुंह सड़क की और था और खून सड़क पर फैल रहा था.

उसे सीधा करने के लिए जैसे ही मैने उसका हाथ पकड़ा, मेरे अंदर जैसे बिजली दौड़ गयी. ये वही हाथ था जिसने मेरे मुश्किल के दिनों में मुझे उम्मीद दिलाई थी, मेरा साथ दिया था, ये मेरी अनिता का हाथ था.

मैं चिल्लाया – अनिताआआ….

जब अनिता को मैने सीधा किया तो उसकी आँखें खुली थी… उसके मुँह से धीरे से निकला – राजेश!

और फिर वो आँखें हमेशा के लिए बंद हो गयी. मेरी अनिता मेरे हाथों में मुझे छोड़ कर इस दुनिया से चली गयी.

दोस्तों, कोई मुझे बताए की ऐसा मेरे साथ क्यूँ हुआ? जिसने मुझे जिंदगी दी वो क्यूँ ऐसे मुझे छोड़ कर चली गयी?


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Updated: November 23, 2014 — 8:27 pm

2 Comments

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  1. very sad story. i also cried and sad also. i hope ki god aapke man ko shanti de.

  2. tumhara dard bahut zyada hai n…god aise hi krta hai…god jo chahta hai wahi hota hai…smjho wo itni achi thi ki use god apne paas bula liya…tumse zyda pane ki siddat god me thi isly god apne paas le gya..take care my dear…n god bless u…

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