UA-37077090-1 Maine kya chaha Pyar ya मैंने क्या चाहा प्यार या

HINDI LOVE STORY

Best Collection of Hindi love Story | हिंदी कहानी | Hindi Story | Stories in Hindi | Hindi Love Stories | Love Stories in Hindi




Maine kya chaha Pyar ya मैंने क्या चाहा प्यार या …


Maine kya chaha Pyar ya मैंने क्या चाहा प्यार या …

मैं सपना आज आप सबको अपनी आप बीती सुना रही हुँ. ये मेरी real story है. सुनाने का मेरा परपज ये नहीं कि आप लोग इसे कोई स्टोरी समझ के मजे लो (as it is not a typical hindi story), बल्कि ये कि लडकियां प्यार के नाम पर सेक्स के ऐसे धोखे का शिकार न बने और लड़के किसी लड़की के सेंटीमेंट्स से, उसके जज्बातों से प्यार के नाम पर खेल ना खेलें. कहानी लम्बी है पर अगर इसे पढ़ के कुछ लड़कियों की ज़िन्दगी बर्बाद होने से बच जाये और कुछ लड़कों के इरादे गलत होने से बदल जाएँ तो मैं समझूंगी कि मेरी ज़िन्दगी बर्बाद होक भी किसी के काम आ गयी. क्यूंकि ऐसा भी हो सकता है कि मैं किसी दिन अपनी जान ही दे दूँ।  खैर… अब बताती हूँ की प्यार या (pyar ya …) इस एक सवाल ने कैसे मेरी ज़िन्दगी का रुख ही बदल कर रख दिया।

मेरी कहानी शुरू हुई जब मैं 9th क्लास में पढ़ती थी।  हमारा स्कूल को-एड था और उसमें लड़के लडकियां दोनों एक साथ पढ़ते थे।  स्कूल शहर से बाहर था और हम लोग यानी मैं, मेरी एक क्लास मेट, दो और लडकियां और दो लड़के एक ऑटो से स्कूल जाया करते थे।  हम छह लोग छटी क्लास से ही साथ में उस ऑटो से स्कूल जाया करते थे।  हमारी अच्छी खासी दोस्ती थी।  दोनों लड़के हम से एक क्लास आगे यानि क्लास 10th में थे।  उनका नाम सुनील और राजेश  था।   बाकि दोनों लड़कियों में एक उन लड़कों के साथ क्लास 10 में ही थी और हम से जूनियर थी क्लास 8th में. उनका नाम सरिता और प्रीती था।   मेरी क्लास मेट का नाम बबिता था।

एक दिन ऐसा हुआ कि बारिश कुछ ज्यादा हो रही थी और ऑटो में केवल हम दो लोग ही स्कूल जा रहे थे।  मैं और राजेश।  उस दिन मैंने पहली बार गौर किया की राजेश सामने बैठा लगातार मुझे ही देख रहा है।  जब भी हमारी नज़र मिलती या हम कोई बात करते थे तो वो इधर उधर देखने लगता था।  उसदिन और कुछ नहीं हुआ लेकिन मुझे कुछ फील हुआ कि राजेश के मन में कुछ है मेरे लिए।

अगले दिन मैंने ये बात बबिता को बताई शाम को. उसका घर और मेरा घर आमने सामने था।  जैसे ही मैंने ये बात बताई तो उसका मुंह उतर गया। मेरी कुछ समझ में नहीं आया लेकिन मैंने कुछ पूछा भी नहीं. फिर वो नार्मल सी हुई कुछ देर में।  हम कुछ देर तक ऐसे ही इधर उधर की बात करते रहे. फिर उसकी मम्मी चाय ले कर आ गयी।  उसके बाद मैं घर वापस आ गई।


फिर कई हफ़्तों तक और कुछ ऐसा नहीं हुआ कि मेरा ध्यान राजेश की तरफ जाये. हालांकि एक दो बार मैंने नोटिस तो किया कि राजेश कभी कभी चुपचाप मुझे देखता रहता है पर मैंने सोच ऐसे ही होगा क्यूंकि उसने कभी कुछ कहा नहीं. वैसे भी वो बड़ा वेल-बिहैव्ड था।  फिर एक दिन अचानक मेरा ध्यान गया कि बबिता राजेश की और देखती है और अचानक चुप हो के कहीं खो सी जाती है. हमारी गप-शप और हंसी मजाक पर भी वो रेस्पोंड नहीं करती।  एकदम से मुझे उस दिन की याद आ गई जब मैंने उसे राजेश के बारे मैं पहली बार बताया था और उस बात को सुन कर कैसे उसके चेहरे का रंग उतर गया था।

 बाकी कहानी मैं अगले पार्ट में लिखूँगी rest story in next part.Ek ajeeb see Hindi story मैंने क्या चाहा प्यार या Part 2

First part of the story – Ek ajeeb see Hindi story मैंने क्या चाहा प्यार या  Part 2

tab tak bye bye.


(Visited 1,445 times, 1 visits today)
Updated: September 21, 2016 — 11:53 pm

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

HINDI LOVE STORY © 2014 Frontier Theme